चार्टर्ड एकाउंटेंट्स के पूरे देश मे हुए विरोध प्रदर्शन ने कराया जी. एस . टी. डिपार्टमेंट के डिप्टी कमिश्नर और सुपरिंटेंडेंट को ससपेंड ।

पिछले हफ्ते से चल रहे विरोध प्रदर्शन के आगे सरकार को झुकना ही पड़ा और वित्तीय मंत्री निर्मला सीतारमण ने इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड एकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया के ऑफिशल्स को बताया कि जी. एस . टी. डिपार्टमेंट के डिप्टी कमिश्नर और सुपरिंटेंडेंट को इतवार को ही ससपेंड कर दिया गया है। लेकिन:

क्या ये सस्पेंशन काफी है?
क्या कोई कानूनी कार्यवाही डिपार्टमेंट के अधिकारियों के खिलाफ प्रारम्भ की गई?
क्या फरार व्यापारी को ढूंढने के प्रयास किये जा रहे है, या कोई सांठ गांठ अब भी चल रही है?
क्या दोनों चार्टर्ड अकाउंटेंट को जमानत मिलेगी?
क्यो की कोई भी सरकारी सस्पेंशन स्थायी नही होता।

ज्ञात रहे कि पिछले हफ्ते से ही चार्टर्ड अकाउंटेंट गुड़गांव जी. एस. टी. डिपार्टमेंट के भेदभाव पूर्ण रवैये के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे। ये प्रदर्शन देश भर में अलग अलग जगह किया जा रहा था वहीं गुडगांव के जी. एस. टी. डिपार्टमेंट के बाहर भारी मात्रा में चार्टर्ड अकाउंटेंट का अनिश्चित कालीन प्रदर्शन चल रहा है। मुरादाबाद ब्रांच पर भी काफी संख्या में चार्टर्ड अकाउंटेंट ने मिलकर विरोध प्रदर्शन दर्ज कराया और कैंडल मार्च के माध्यम से डिपार्टमेंट की मरती हुई आत्मा को झकझोरने का कार्य किया।

पिछले हफ्ते गुड़गांव जी. एस. टी. डिपार्टमेंट ने 15 करोड़ का रिफंड एक व्यापारी को जारी किया, बाद में ये रिफंड सही न पाते हुए 2 चार्टर्ड अकाउंटेंट को गिरफ्तार कर लिया गया। बल्कि रिफंड करने वाले जी. एस. टी. अधिकारियों और व्यापारी के ऊपर कोई भी कार्यवाही नही की। यही देखकर देश भर के चार्टर्ड एकाउंटेंट्स में रोष व्याप्त थाउनका कहना था कि इस मात्र सर्टिफिकेट चार्टर्ड अकाउंटेंट के जारी कर देने से डिपार्टमेंट के अधिकारी और व्यापारी अपने कर्तव्यों और रिफंड के जांच के नियमो से कैसे छुटकारा पा सकते है।

Meeting of ICAI Officials with Finance Minister Nirmala Sitaraman

उनका कहना ये भी था कि अगर चार्टर्ड अकाउंटेंट पर कार्यवाही हुई है तो डिपार्टमेंट के अधिकारियों पर क्यों नही, क्यों कि उन्ही ने पेपर्स को वेरीफाई करने के बाद रिफंड इशू किया, रिफंड जारी करना चार्टर्ड अकाउंटेंट के हाथ में नही होता। सबसे बड़ा सवाल ये था की 107 मिनट के अंदर डिपार्टमेंट ने पपेर्सको वेरीफाई कैसे कर लिया, कोई साइट विजिट नही हुई, व्यापारी से पूछताछ नही हुई, और रिफंड जारी कर दिया गया, ऐसा क्या दवाब था डिपार्टमेंट के अधिकारियों के ऊपर, या क्या सांठ गांठ थी अधिकारियों की , जो 107 मिनट में ही रिफंड को जारी कर दिया गया।

इतनी लापरवाही के बाद भी डिपार्टमेंट के अधिकारियों पर कोई कार्यवाही नही हुई, और दोषी बनाया गया तो सिर्फ एक चार्टर्ड अकाउंटेंट को। 
ज्ञात रहे कि अभी तक दोनों चार्टर्ड अकाउंटेंट की जमानत नही हुई है । 

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